ये 4 चीज़ें कर देंगी डेंगू का सफाया Dengue cure in Hindi

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Dengue cure in Hindi भारत में डेंगू बुखार एक बड़ी समस्या बन गया है.  डेंगू मच्छर जनित बीमारी है, जो लगभग देश के हर कोने में होती है. रोगी के शरीर में मच्छर द्वारा जैसे ही परजीवी प्रवेश करता है, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सक्रिय हो उठती है और परजीवी को नष्ट करना शुरू कर देती है. लेकिन लेकिन डेंगू के कीटाणुओं को मारने वाले जीवाणुओं की खुराक प्लेटलेट्स होते हैं, इसलिए ये जीवाणु खून में मौजूद प्लेटलेट्स को खाने लगते हैं और रोगी के शरीर में प्लेटलेट्स बहुत तेजी से कम हो जाते हैं. इससे रोगी गंभीर खतरे में पड़ जाता है और रोगी की जान भी जा सकती है ऐलोपथी में डेंगू का कोई इलाज नहीं है. लेकिन प्रकृति ने कुछ वस्तुएं ऐसी दी हैं, जिनसे डेंगू को नियंत्रण में कर रोगी को गंभीर खतरे में जाने से बचाया जा सकता है.

अगर डेंगू हो जाए तो क्या करना चाहिए?

डेंगू अमूमन बदलते मौसम में यानी अप्रैल मई और सितम्बर-अक्टूबर में होता है. अगर इस समय बुखार एक दिन से ज्यादा रहे तो खून में blood cell count जाँच करानी चाहिए. इससे बुखार के कारण का और डेंगू के कारण होने वाले प्लेटलेट्स में कमी का पता चल जाता है.

खून में प्लेटलेट्स कम होना Blood Cell Count

यदि Blood Cell Count जाँच में प्लेटलेट्स की संख्या कम होती दिख रही है, तो रोगी को निम्न वस्तुएं तुरंत शुरू कर दें

Dengue Treatment Food in Hindi-

प्रचुर मात्रा में पेय पदार्थ

डेंगू की पुष्टि होने पर रोगी को तुरंत पेय पदार्थ देना शुरू करें. इनमे फलों का रस, शरबत, ORS, नमक चीनी का घोल आदि दिया जा सकता है. या फिर सादा पानी उबाल कर ठंडा कर रोगी को दिया जा सकता है. यदि रोगी को उलटी हो रही हो तो सेब के रस में कुछ बूँदें नीम्बू की डालकर देनी चाहियें.

 गेहूं घास रस Wheat Juice

जब खून में प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं, तो रोगी के शरीर में नए खून की आवश्यकता होने लगती है. गेहूं घास रस नया खून बनाता है तथा प्लेटलेट्स घटने पर रोगी को तुरंत शक्ति प्रदान करता है. अगर रोगी को रोज़ सुबह खाली पेट गेहूं घास का रस पिला दिया जाये, तो रोगी डेंगू की वजह से गंभीर खतरे में जाने से बच जाता है.

पपीते के पत्तों का रस Papaya Leaves Juice

जैसे ही Blood Cell Count जाँच में रोगी के शरीर में प्लेटलेट्स घटने की पुष्टि हो, रोगी को तुरंत दिन में 2-३ बार पपीते के पत्ते का रस देना शुरू कर देना चाहिए. वैसे तो पपीते के पत्ते के रस में ढेर सारे गुण होते हैं-जैसे भूख बढ़ाना, गैस और एसिडिटी ख़त्म करना, लीवर ठीक करना. लेकिन पपीते के पत्ते के रस में प्लेटलेट्स बढ़ाने की जबरदस्त क्षमता होती है. इसके इस्तेमाल से पहले ही दिन से प्लेटलेट्स बढ़ने लगते हैं.

गिलोय रस/सत्व Giloy Juice

गिलोय प्रकृति का मानव को दिया गया अनुपम उपहार है. अगर गिलोय के गुणों की चर्चा करेंगे तो किताब लिखी जा सकती है. डेंगू की बीमारी में गिलोय रामबाण औषधि है. डेंगू के रोगी को दिन में 2-3 बार गिलोय और पपीते के रस का काढ़ा या गिलोय भस्म या पाउडर देने से खून में प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ने लगेगी. साथ ही डेंगू से लड़ने वाली रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी.

giloy jiuce

(नोट : गेहूं घास रस, पपीते के पत्ते का रस और गिलोय का रस बाज़ार में उपलब्ध होता है. लेकिन अगर संभव हो तो ये वस्तुएं ताज़ी लाकर अपने घर पर बनाकर रोगी को देना ही उचित होता है. अगर ये वस्तुएं मिलना असंभव हो जाये, तभी बाज़ार में उपलब्ध वस्तुएं दी जानी चाहियें)

 

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