गठिया बाय का रामबाण इलाज  100% केमिकल फ्री – आर्गेनिक  प्राकृतिक अचूक रोगोपचार द्वारा

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गठिया बाय का रामबाण इलाज – क्या आपको सीढ़ियां चढ़ने उतरने में तकलीफ होती है,  सुबह उठने पर सारे जोड़ों में जकड़न होती है,  खून में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ गयी है,  जोड़ों के आसपास सूजन व दर्द है जो सर्दी में  बढ़ जाता है, तो ये गठिया रोग के लक्षण हैं. आज गठिया से भारत के 30 करोड़ से अधिक लोग दर्द में जीने को मजबूर हैं.

गठिया के बाय के 3 कारण हैं –

ऑक्सीडेशन तनाव (Oxidative Stress)

 शरीर की कोशिकाएं चयापचय प्रक्रियाओं के दौरान मुक्त कणों का उत्पादन करती हैं।शरीर में मुक्त कणों (फ्री रेडिकल्स) और एंटीऑक्सीडेंट के बीच असंतुलन  होने से कोशिका और ऊतकों को  हानि की स्थिति से क्रोनिक कंडीशन जैसे कैंसर, गठिया, डायबिटीज और हृदय रोग व घातक बीमारियां उत्पन्न होती हैं।

जापान के जल संस्थान टोक्यो के निदेशक डॉ.हिदेमित्सु हयाशी के अनुसार, क्योंकि सक्रिय ऑक्सीजन एक मुक्त कण है और यह सामान्य ऊतक को नुकसान पहुंचा सकता है, स्वस्थ ऊतक को नुकसान होने से पहले इसे हटाने या इसे बेअसर करने के लिए आवश्यक है। “अगर हम सक्रिय ऑक्सीजन द्वारा स्वस्थ ऊतक के ऑक्सीकरण को अवरुद्ध करने के लिए एक प्रभावी तरीका पा सकते हैं, तो हम बीमारी को रोकने का प्रयास कर सकते हैं,”।

Dr. Swati Bhatnagar

अम्लीयता तनाव (Acidic Stress)

आज हमारी खराब जीवन शैली, हानिकारक कीटनाशक रहित मिलावटी आहार व प्रदूशित वातावरण हमारे शरीर की कोशिकीय अम्लता को गंभीर रूप से बढ़ाकर तनाव बना रहा है। क्योंकि पीएच संतुलन और एसिड बफरिंग मानव स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए शरीर को OH- (एक नकारात्मक विद्युत आवेश के साथ हाइड्रॉक्सिल आयन), देना अतिआवश्यक है जो साथ ही आयनिक क्षारीय खनिज युक्त होते हैं। OH- आयनों की यह बहुतायत रक्त में बाइकार्बोनेट बफर को बढ़ाती है, शरीर को संतुलित करती है और एसिड और विषाक्त पदार्थों को निष्प्रभावी और उत्सर्जित कर स्वाथ्य प्रदान करने में सक्षम  है।

पानी की कमी से तनाव  (DeHydration Stress)

शरीर का 70% हिस्सा पानी से बना होता है, और अध्ययनों से पता चला है कि ज्यादातर लोग स्थायी रूप से आंशिक रूप से हमेशा डिहाइड्रेशन के शिकार होते हैं। चूंकि औसत वयस्क प्रतिदिन सांस लेने, पसीने से विषैले द्रव्यों को खत्म करने से 10 कप से अधिक पानी खोता है इसकी भरपाई करने की क्षमता सिर्फ गुणवत्ता वाले पानी से ही होती है, साधारण पानी से नहीं। और लंबे समय तक डिहाइड्रेशन के कारण कोशिकाएं सिकुड़ने लगती हैं। जोड़ों में अकड़न व दर्द का यही प्रमुख कारण बनता है। लेकिन जब शरीर को क्षारीय, अत्यधिक आयनित और सूक्ष्म आकार संकुलित पानी से हाइड्रेट किया जाता है, तो अम्लता और डिहाइड्रेशन को कम करने की क्षमता लगभग तत्काल हो जाती है।

पानी को ही शरीर को संतुलित करने का एक उपकरण बनाया जा सकता है जो तीनों ही तनावों पर सकारात्मक प्रभाव देता है। जिससे जोड़ों में लुब्रिकेशन प्रक्रिया स्वचालित होकर अकड़न, दर्द, सूजन और कमजोरी सब ठीक हो जाती है।

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