आधुनिक सिंथेटिक कंबल अपनी सुविधा और गर्माहट के लिए लोकप्रिय हो गए हैं। पारंपरिक सूती रजाई, जिसमें बार-बार रुई भरवाने और धुनवाने का झंझट होता था, की तुलना में ये कंबल बहुत आसान लगते हैं। लेकिन यह आधुनिक सुविधा अपने साथ महत्वपूर्ण, छुपे हुए स्वास्थ्य जोखिम लेकर आती है, जो खतरनाक रसायनों और सामग्रियों की कीमत पर मिलती है और हमारे स्वास्थ्य को चुपचाप नुकसान पहुंचा सकती है।
खतरनाक रसायनों का प्रयोग
गर्माहट और हल्कापन, प्राप्त करने के लिए सिंथेटिक कंबलों को हानिकारक पदार्थों से बनाया जाता है। निर्माण प्रक्रिया के दौरान इनमें विशेष रूप से दो कैंसर पैदा करने वाले रसायन मिलाए जाते हैं:
• परफ्लोरो अल्काइल सल्फोनेट: यह एक कैंसर पैदा करने वाला पदार्थ है, जो कि पॉलिस्टर बनाते वक्त कंबल में डाला जाता है।
• एंटीमोनी: यह भी एक कैंसर पैदा करने वाला पदार्थ है जो इन सिंथेटिक उत्पादों में मौजूद होता है।
फेफड़ों के दुश्मन
इन अदृश्य रासायनिक खतरों के अलावा, ये कंबल एक भौतिक खतरा भी पैदा करते हैं जिसे हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं। इन कंबलों से निकलने वाले छोटे-छोटे रेशे (माइक्रोफाइबर) एक और बड़ा खतरा हैं। जब हम रात में कंबल ओढ़कर सोते हैं, तो हम सांस के जरिए इन सूक्ष्म कणों को अपने शरीर के अंदर ले जाते हैं। बच्चों के लिए यह जोखिम और भी बड़ा है, क्योंकि उनकी आदत कंबल चबाने की होती है, जिससे ये फाइबर सीधे उनके मुंह में चले जाते हैं।
एक बार जब ये माइक्रोफाइबर (माइक्रोप्लास्टिक) शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, तो वे एक गंभीर समस्या बन जाते हैं। हमारे पूर्वजों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले प्राकृतिक कपास के रेशों के विपरीत, जिन्हें हमारा शरीर बलगम के जरिए आसानी से बाहर निकाल सकता है, इन माइक्रोप्लास्टिक को शरीर का पाचन तंत्र तोड़ नहीं पाता है। परिणामस्वरूप, ये कण टूटते नहीं हैं और पूरे रक्तप्रवाह में घूमते रहते हैं।
माइक्रोफाइबर के हानिकारक प्रभाव
शरीर में इन माइक्रोफाइबर के घूमने से होने वाले गंभीर परिणाम इस प्रकार हैं:
| माध्यम | होने वाले गंभीर रोग |
| सांस के जरिए | इससे शरीर में अस्थमा धीरे-धीरे बनता चला जाता है, खासकर छोटे बच्चों में। |
| खून में जरिये | रक्त में घूमते हुए ये कण शरीर में कहीं भी जमा हो सकते हैं। कभी यह कैंसर बन जाता है, कभी स्ट्रोक की शिकायत आती है, तो कभी यह हेमरेज बन जाता है। |
बालों का झड़ना और गंजापन बढ़ना
कैंसर और अस्थमा जैसे गंभीर जोखिमों के अलावा, यह कंबल एक और आश्चर्यजनक दुष्प्रभाव का कारण बनता है। कई लोग शिकायत करते हैं कि सर्दियों में उनके बाल बहुत ज्यादा झड़ने लगते हैं। इसका एक कारण आपका सिंथेटिक कंबल हो सकता है। यह कंबल हवा को पूरी तरह से रोक देता है और जब यह आपके शरीर की गर्मी के संपर्क में आता है, तो यह ऐसे रसायन छोड़ता है जो शरीर की कोशिकाओं, विशेष रूप से बालों की जड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसी क्षति के कारण जब आप सुबह उठते हैं, तो आपको अपने बेड पर सिर्फ आपके झड़े हुए बाल दिखते हैं।
इन सभी खतरों को देखते हुए यह स्पष्ट हो जाता है कि यह तथाकथित मॉडर्नाइजेशन हमारी जान से खेल रहा है। ये आधुनिक, रंग-बिरंगे कंबल एक “दिखावा” हैं जो कैंसर पैदा करने वाले रसायनों, अस्थमा और बालों के झड़ने जैसी समस्याओं से जुड़े हैं और हमारे परिवार के स्वास्थ्य को खतरे में डालते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि आप इस जानकारी को अपने प्रियजनों के साथ साझा करें ताकि वे अपने और अपने परिवार की भलाई के लिए सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प चुन सकें। हमारे पूर्वज हमसे कहीं ज्यादा समझदार थे। वे कपास का उपयोग करते थे, जो एक पूरी तरह सुरक्षित विकल्प है। अगर कपास के रेशे शरीर में चले भी जाएं, तो वे स्वाभाविक रूप से बाहर निकल जाते हैं, जिससे कोई दीर्घकालिक खतरा नहीं होता। यह एक समझदारी भरा और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प था।
