उपवास है वजन घटाने का सबसे सस्ता व असरदार नुस्खा | Cheapest way to lose weight fast

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क्या आप वजन घटाने का सबसे सस्ता नुस्खा Cheapest way to lose weight fast या वजन घटाने के उपाय ढूंढ रहे हैं? तो यह article आपकी बहुत मदद करेगा. इस article को पूरा पढ़ें और बिना किसी परेशानी के वजन घटायें.

वजन घटाने के उपाय के रूप में अपनाएं उपवास

फ़ास्ट फ़ूड, सुख-सुविधाओं और मशीनों के इस दौर में वजन बढ़ना एक सामान्य बात है. लेकिन गंभीर बात यह है कि लोग आरंभ में वजन बढ़ने को समृद्धि का पैमाना मानते हैं और उसे नज़रअंदाज़ करते हैं. लेकिन वह बढ़ा हुआ वजन बाद में दर्जनों बीमारियों को जन्म देता है. उनमें से कुछ प्रमुख बीमारियाँ डाईबिटीज़, ह्रदय रोग, नपुंसकता आदि हैं. आजकल लोगों में जैसे जैसे वजन बढ़ने की प्रवृत्ति बढती जा रही है, वैसे-वैसे वजन घटाने के नए-नए बिज़नस भी बढ़ते जा रहे हैं, जो रोगियों से हजारों या लाखों रुपये ले लेते हैं. एक बार तो उनका वजन घट जाता है, लेकिन कुछ दिन बाद वही परिस्थिति फिर से आ जाती है. इसलिए वजन घटाने का कोई ऐसा उपाय अपनाना चाहिए जो सस्ता भी हो और स्थायी भी हो. ऐसा ही एक उपाय है उपवास. आप उपवास को वजन घटाने के उपाय के रूप में बेहिचक अपना सकते हैं.

उपवास का अर्थ क्या है

हमारे देश में उपवास एक संस्कृति है. हर साल कई त्यौहार ऐसे आते हैं, जिस दिन उपवास अवश्य करना होता है. नवरात्र में तो 9 दिनों के उपवास का नियम है. लेकिन धार्मिक पर्वों पर जो उपवास होता है, वह पूर्ण उपवास नहीं है. इन धार्मिक पर्वों पर केवल अन्न और अमिष पदार्थ खाना ही निषिद्ध है. दूध से बने पदार्थ, मिठाईयां, और फल खूब खाए जाते हैं. व्रत खोलते समय भी खूब पेट भर कर खाया जाता है. यह उपवास नहीं है. ऐसे अवसरों पर उपवास करने वाले लोगों का वजन और बढ़ जाता है. क्योंकि वे उपवास के दौरान अन्न भले ही न खाते हों, दूसरे वजन बढ़ाने वाले पदार्थ बहुत खाते हैं.

उपवास भोजन न करने का नाम नहीं है. उपवास का अर्थ बहुत व्यापक है. उपवास एक विज्ञान है. उपवास एक कला है. उपवास करने से हमारे शरीर पर स्वास्थ्य के साथ साथ मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक प्रभाव पड़ते हैं. उपवास मनुष्य का सर्वांगींण विकास करता है.

उपवास द्वारा बिना व्यायाम के वजन कैसे कम करें

उपवास का यह एक मौलिक सिद्धांत है कि उपवास के दौरान शरीर की सारी कार्य प्रणालियाँ सुचारु रूप से चलती रहें. यदि उपवास के दौरान शरीर की कोई क्रिया बाधित होती है, तो इसको उपवास नहीं, भुखमरी कहा जायेगा. जब हम उपवास करते हैं तो पानी सांस लेना बंद नहीं करते हैं. ऑक्सीजन और पानी शरीर द्वारा नियमित रूप से ग्रहण किया जाता है. केवल कैलोरी वाली वस्तुएं नहीं खायी जाती हैं. हमारा शरीर आवश्यक क्रियाओं के लिए शरीर में संचित पौष्टिक पदार्थों का उपयोग करता है. धीरे धीरे शरीर में जमा हुए सारे पौष्टिक पदार्थ और चर्बी शरीर द्वारा प्रयोग कर ली जाती है. इस प्रकार के उपवास से शरीर में कमजोरी आये बिना वजन तेजी से कम होता है.

वजन घटाने के लिए उपवास के प्रकार

उपवास भोजन न करने का नाम नहीं है. लेकिन उपवास भुखमरी भी नहीं है. उपवास और भुखमरी में अंतर होता है. उपवास उतने ही समय तक रख सकते हैं जितने समय तक हमारा शरीर अपने तंतुओं में संचित तत्त्वों के बल पर उपवास को सहन कर सकता है. लेकिन भुखमरी भूखे मरने तक चलती है. उपवास में शरीर के पौष्टिक तत्व नष्ट नहीं हो पाते, जबकि भुखमरी में पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं और शरीर अंत की और बढ़ने लगता है. लोग भुखमरी को उपवास समझते हैं. इसलिए उपवास को वजन घटाने के उपाय के रूप में नहीं अपना पाते.

उपवास से वजन घटने का मुख्य कारण हमारे आहार में चीनी, चर्बी और स्टार्च की मात्रा का घटना है. तब शरीर विभिन्न हिस्सों में संगृहीत चीनी, चर्बी और स्टार्च को प्रयोग करता है, जिससे वजन घटता है.

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वजन घटाने के लिए 3 प्रकार से उपवास किया जा सकता है –

पूर्ण उपवास या जल उपवास

इस प्रकार के उपवास में कोई भी खाद्य पदार्थ ग्रहण नहीं किया जाता है. यह पूर्ण उपवास होता है. लोग इस प्रकार के उपवास को असंभव मानते हैं. लेकिन पूर्ण उपवास संभव है. हमारा शरीर बचपन से ही पौष्टिक तत्वों को ग्रहण करता है. ये तत्त्व शरीर के विभिन्न हिस्सों में इकट्ठे हो जाते हैं. इन्हीं तत्त्वों के बल पर हमारा शरीर बिना खाए भी 100 दिनों तक रह सकता है. लेकिन यह उपवास किसी योग्य चिकित्सक की देखरेख में किया जाना चाहिए.

फल-रस उपवास

फल-रस उपवास में सिर्फ फल और फलों का रस ही ग्रहण किया जाता है. वह भी सिर्फ आवश्यकता पड़ने पर. इस प्रकार के उपवास को 100 दिनों से ज्यादा भी किया जा सकता है. कुछ लोग केवल दूध पीकर ही उपवास करते हैं.

शाक-रक उपवास

शाक-रस उपवास में सिर्फ कच्ची और उबली सब्जियां, साग और सब्जियों और पत्तियों का रस ही ग्रहण किया जाता है. सब्जियां या सब्जियों का रस आवश्यकता पड़ने पर 3 या चार दिन में एक बार लिया जाता है. इस प्रकार के उपवास को भी 100 दिनों से ज्यादा भी जा सकता है. कभी अगर लगे कि पेट साफ़ नहीं हो रहा तो शाम को चोकर की खीर खा लेनी चाहिए.

कुछ लोग वजन घटाने के लिए भोजन की मात्रा कम कर देते हैं. लेकिन ऐसा करने पर भी कोई लाभ नहीं होता, क्योंकि एक समय ऐसा आता है जब उन्हें भूख बहुत व्याकुल करती है और वे जमकर भोजन करते हैं. इससे वजन और बढ़ जाता है. लेकिन उपवास में 2 या दिन के उपवास के बाद भोजन के लिए व्याकुलता बिलकुल ख़त्म हो जाती है. यहाँ तक कि भोजन सामने होने पर भी भोजन करने को मन नहीं करता.

वजन घटाने के लिए किये गए उपवास के लाभ

उपवास के बहुत से लाभ हैं. जब वजन घटाने के लिए उपवास किया जाता है तो शरीर में कई सकारात्मक बदलाव होते हैं.

  • शरीर का वजन बिना किसी खतरे के घटता है.
  • पेट में भारीपन ख़त्म हो जाता है.
  • शरीर से आलस्य ख़त्म हो जाता है.
  • High Blood Pressure की समस्या ख़त्म हो जाती है.
  • कब्ज़ और बदहज़मी ख़त्म जाती है.
  • उपवास से शरीर की त्वचा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता.
  • पहले से अधिक आसानी से श्वास चलने लगती है.
  • शरीर की सञ्चालन क्रिया अधिक सुगम व सरल हो जाती है.
  • थकावट का एहसास बिलकुल ख़त्म हो जाता है.

व्रत और उपवास में क्या अंतर है?

आमतौर पर सब लोग एक निश्चित समय पर नाश्ता, दोपहर का खाना या रात का खाना खाते हैं. लेकिन किसी त्यौहार पर हम अपने इष्ट की पूजा और भोग लगाये बिना खाना नहीं खाते हैं. इसको व्रत कहते हैं. यह कुछ घंटों से लेकर पूरे दिन का हो सकता है.
जबकि उपवास को आयुर्वेद के नियमों के अनुसार अपने शरीर को स्वच्छ करने और रोगों की चिकित्सा के लिए स्वेच्छा से किया जाता है. यह 1 दिन से लेकर 45 दिनों तक का हो सकता है.

उपवास कितनी तरह के होते हैं

उपवास 3 तरह के होते हैं.
1. पूर्ण उपवास या जल उपवास
2. फल व रस उपवास
3. शाक-सब्जी उपवास

उपवास चिकित्सा क्या है?

उपवास चिकित्सा प्राकृतिक चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण घातक है. आयुर्वेद के अनुसार शरीर के अन्दर जमा गन्दगी रोगों का प्रमुख कारण है. जब रोगी को उपवास कराकर उसके अन्दर जमा गंदगी को बाहर निकाला जाता है, तो उस व्यक्ति के रोगों में तेजी से सुधार होता है. इस प्रकार की चिकित्सा को उपवास चिकित्सा कहते हैं.

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