9 कहावतों में स्वास्थ्य रक्षा के सूत्र

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भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में प्रशिक्षित वैद्य हकीमों के अतिरिक्त स्वास्थ्य की परम्पराएँ कहावतों के रूप में भी मौजूद हैं, जिनमे स्वास्थ्य रक्षा के सूत्र छिपे हुए हैं. ये कहावतें और लोकोक्तियाँ आम जनमानस को स्वस्थ रहने में मदद करती हैं. इन कहावतों में सामान्य बीमारियों के उपचार और घरेलू उपाय छिपे होते हैं. भारत का बड़ा वर्ग इन कहावतों में माध्यम से स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहता है. ये कहावतें भारत की हर भाषा, हर समुदाय, हर जाति और जनजाति में उपलब्ध हैं. ये कहावतें आज भी अपने मूल स्वरुप में उपलब्ध हैं. इनमें छिपे स्वास्थ्य रक्षा के सूत्र शीघ्र परिणाम भी देते हैं. उत्तर भारत में हिंदी व खड़ी बोली में असंख्य कहावतें व लोकोक्तियाँ प्रसिद्ध हैं.

स्वास्थ्य रक्षा के सूत्र

कुछ कहावतों और लोकोक्तियां हम यहाँ पर दे रहे हैं, जिनमें स्वास्थ्य रक्षा के सूत्र छिपे हैं –

दांतों को मजबूत बनाने का घरेलू नुस्खा

त्रिफला त्रिकुटा मौलिश्री सातों नमक पतंग 

दांत वज्र हो जात है माजूफल के संग 

व्याख्या : त्रिफला (हरड, बहेड़ा और आंवला), त्रिकटु (सौंठ, काली मिर्च और पिप्पली), मौलिश्री की छाल, सातों नमक (वास्तव में 5 नमक माने जाते हैं – सेंधा नमक, समुद्री नमक, नौसादर, काला नमक तथा खारा नमक) और पतंग के पेड़ की लकडी को माजूफल के साथ कूटपीस कपडछन कर लें. इस चूर्ण का दांतों पर मंजन करने पर दांत वज्र से मजबूत हो जाते हैं.

पेट दर्द के लिए घरेलू नुस्खा

सौंठ सोहागा सोचर गांधी, सहजन के रस गोली बांधी

अस्सी शूल बहत्तर बाई, कहे धन्वन्तरी छन में जाई.

व्याख्या : इस लोकोक्ति में पेट के सभी प्रकार के दर्द को ख़त्म करने का योग दिया है. पेट में दर्द (शूल) अधिकतर अपच, पेट में कीड़े, गैस जमा होने से, कब्ज़ होने आदि से होता है. उपर्युक्त योग में बताये गए सौंठ, सोहागा, सोचर (सोवर्चल या काला नमक), गांधी (हींग)  आयुर्वेद के मतानुसार भूख बढाने वाली, पाचक, रेचक( पेट साफ़ करने वाली) वतानुलोमक (गैस निकालने वाली), जलन मिटाने वाली, दर्द मिटाने वाली, कीड़े मारने के गुणों वाले होते हैं. इन सबका चूर्ण करके सहजन में रस में मिलकर गोली बना लें. इस कहावत के अनुसार इस गोली को लेने से 80 प्रकार के शरीर के दर्द और 72 प्रकार की बाय ख़त्म हो जाती है.

अच्छे पाचन के लिए घरेलू नुस्खे

निन्ने पानी जे पिए, हर्र भूंज के खाय

दूध बियारी जे करे, ता घर बैद न जाय

व्याख्या : इस लोकोक्ति में प्रातः खाली पेट पानी पीने का लाभ बताया गया है. तात्पर्य यह है कि जो व्यक्ति सुबह खाली पेट पानी पीता है, खाना खाने के बाद हरड़ भून कर खाता है और रात में सोते समय दूध लेता है उसके घर में वैद्य नहीं जाता. अर्थात वह व्यक्ति सदैव स्वस्थ रहता है.

आधे पेट अन्न, पौन पेट नो पानी 

खाके बाएं सोवे, मरे बैद की नानी.

व्याख्या : भोजन चाहे जैसा भी हो. उसकी एक सुनिश्चित मात्रा है. आधा पेट ठोस आहार (अन्न, साग, सब्जी, फल, मिठाई इत्यादि) लें, चौथाई पेट द्रव (समयानुसार पानी, मट्ठा या दूध) के लिए और चौथाई पेट आहार के संचरण (भोजन की गति के लिए उदर में स्थान रहना चाहिए) के लिए छोड़ना चाहिए. खाना खाकर बायीं करवट सोने चाहिए. इससे व्यक्ति सदैव स्वस्थ रहता है. दाहिनी और यकृत, पित्ताशय, पित्त नलिका है. अतः दाहिनी करवट सोने से पित्त स्राव में बाधा पड़ती है. ऐसे में खाना खाने के बाद बायीं करवट सोना चाहिए.

इम्युनिटी बढाने के घरेलू नुस्खे

ठंडो सपड़े, तातो खाय

ता घर बैद कबहूँ न जाय 

व्याख्या : इस लोकोक्ति के अनुसार हमेशा ठन्डे पानी से स्नान करना और गरम-गरम भोजन करने से घर में डॉक्टर नहीं आता. अर्थात व्यक्ति स्वस्थ रहता है.

आँखों के रोगों के लिए घरेलू नुस्खे

मिट्टी के नव पात्र में त्रिफला रात्रि में डारी 

सुबह सवेरे धोय के आँख रोग को टारि.

व्याख्या : मिट्टी के नए बर्तन में त्रिफला का चूर्ण रात को पानी में भिगो दें. सुबह को पानी निथार कर उस पानी से आँखों को धो लें. इससे आँखों के रोग मिटते हैं और आँखों की रौशनी बढती है.

काली मिर्च को पीस कर घी बुरे संग खाय 

नैन रोग सब दूर हों, गिद्ध दृष्टि हो जाय .

व्याख्या : काली मिर्च को महीन पीसकर घी और शक्कर या बूरा के साथ खाने से आँखों के रोग दूर होते हैं और दृष्टि गिद्ध जैसी तेज हो जाती है.

बालों को काला रखने के लिए घरेलू नुस्खा

त्रिफला जल से जो सिर धोवे, बाल सफ़ेद न वाको होवें 

व्याख्या : जिन लोगों के कम उम्र में बाल सफ़ेद होने लगते हैं, उनके लिए यह सूत्र है. त्रिफला को रात को पानी में भिगो दें. सुबह पानी निथार कर उस पानी से बालों को धो लें. नियमित इस्तेमाल से बाल असमय सफ़ेद नहीं होते.

बिच्छू के डंक का उपचार

लहसुन दूध मदार को दोनों संग मिलाय

बिच्छू काटे पर धरै, तुरतहिं विष मिट जाय.

व्याख्या : लहसुन और मदार (आक) का दूध मिलाकर उस स्थान पर रख दें, जहाँ पर बिच्छू ने डंक मारा हो. विष तुरंत उतर जाता है.

 

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