मैदानी इलाकों में पाए जाने वाले 5 औषधीय पौधे और उनके गुण

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आज हम आपको 5 औषधीय पौधे और उनके गुण के बारे में बताने जा रहे हैं. ये सभी पौधे भारत मैदानी भागों में मिलते हैं. इन औषधीय पौधों की खेती भी की जाती है.

Table of Contents

5 औषधीय पौधे और उनके गुण

1. असगंध (अश्वगंधा) | Ashwagandha ka paudha

अश्वगंधा एक सीधा झाड़ीदार औषधीय पौधा है. अश्वगंधा की जड़ और बीज औषधियों में काम आता है. बीमारियों के लिए अश्वगंधा के बीज का उपयोग सबसे अधिक होता है.

अश्वगंधा की पहचान | अश्वगंधा का पौधा कैसा होता है

अश्वगंधा का पौधा

अश्वगंधा 2 से 3 फीट लम्बा बहुशाखीय पौधा है. 5 से 10 सेमी के अंडाकार आकर में होते हैं. इस पर गहरे हरे फल लगते हैं, जो दिखने में मकोय के फल तरह लगते हैं. पकने पर फल लाल रंग के हो जाते हैं. इसके बीज हलके पीले रंग के चपटे आकार के होते हैं. अश्वगंधा के पत्ते ashwagandha leaves हलके हरे रंग के तथा सख्त होते हैं

अश्वगंधा का पेड़ कहाँ मिलता है | where ashwagandha tree found

प्राकृतिक रूप में अश्वगंधा का पेड़ ashwagandha tree भारत के उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों के मैदानी भागों में एवं हिमालय की निचली उष्ण घाटियों में बहुतायत से पाया जाता है. इसकी खेती भी होती है. खेती से प्राप्त पौधे को अक्सर असगंध नागौरी के नाम से बुलाते हैं. कम सिंचाई वाले इलाकों जैसे राजस्थान और मध्य प्रदेश के सीमांत क्षेत्रों में अश्वगंधा tree की खेती बहुतायत से होती है. पहाड़ी इलाकों में भी इसकी खेती होती है.

अश्वगंधा के औषधीय गुण | अश्वगंधा के फायदे | ashwagandha ke fayde in hindi

अश्वगंधा की जड़ एक बलवर्धक रसायन है. यह स्त्रियों के कमरदर्द एवं श्वेत प्रदर में बेहद कारगर रसायन है. बच्चों के लिए भी यह एक उत्तम बलवर्द्धक औषधि है. अपानवायु के कारण होने वाले रोगों में अश्वगंधा काफी लाभ देती है. अश्वगंधा का प्रयोग अश्वागंधा चूर्ण, अश्वगंधा घृत, अश्वगंधारिष्ट, धातुपौष्टिक चूर्ण, रसराज रस इत्यादि औषधियों में किया जाता है.

2. मुलेठी | Mulethi plant

मुलेठी पतले तने और नुकीले पत्तों वाला औषधीय पौधा है. mulethi plant का तना औषधि बनाने के काम आता है.

मुलेठी के पौधे की पहचान | मुलेठी का पौधा कैसा होता है

मुलेठी का पौधा

मुलेठी के पौधे 2 फीट से 5 फीट तक लम्बे होते हैं. इनका तना पतला और मुलायम होता है तथा स्वाद में मीठा होता है. इनकी पत्तियां आयताकार और चौड़ी होती हैं. इनके फूल हलके गुलाबी रंग के होते हैं. मुलेठी का बीज लाल रंग का होता है

मुलेठी का फल कैसा होता है?

मुलेठी फल लाल रंग का होता है. . इसके वजन पर ही भारतीय पारंपरिक वजन की इकाई “रत्ती” आधारित है.

मुलेठी किस रोग की दवा है?

मुलेठी गले के रोगों, जैसे खांसी, टोंसिल, ह्रदय रोग, वात रक्त, अपस्मार, स्वरभंग, पांडुरोग, मूत्रविकारों, में उपयोगी है.

मुलेठी का पौधा कहाँ मिलता है

मुलेठी मूलतः  तुर्किस्तान, ईरान और अफगानिस्तान के क्षेत्रों का आदिवासी पौधा है. इन क्षेत्रों में मुलेठी की व्यावसायिक खेती होती है. भारत में फारस की खाड़ी, ईरान, साइबेरिया, स्पेन आदि देशों से मुलेठी का आयात किया जाता है.  भारत में भी पंजाब,कश्मीर, उत्तर प्रदेश, तथा हरियाणा में कुछ जगहों पर मुलेठी की खेती हो रही है.

मुलेठी के औषधीय गुण | मुलेठी पाउडर के फायदे | mulethi powder ke fayde in hindi

मुलेठी के चूर्ण mulethi powder को दूध के साथ सेवन करने से बल में वृद्धि होती है. इसके तने और को सुखाकर चूर्ण बनाया जाता है. इसके चूर्ण में ग्लीसिरईजिन नामक तत्व होता है. इसके अलावा सुक्रोज एवं डेक्ट्रोज़, स्टार्च, प्रोटीन, वसा, रेजिन आदि तत्व पाए जाते हैं. मुलेठी पाउडर का प्रयोग मधुयष्ठयादि चूर्ण, कस्वती, श्वासचिंतामणि, दशमूलारिष्ट, एलादिवटी, अश्वगंधारिष्ट आदि औषधियों में किया जाता है.

3. सनाय का पौधा | Sanay plant

सनाय एक बहुशाखीय झाड़ीदार औषधीय पौधा है. Sanay plant का पत्ता और फली औषधि बनाने के काम में लिए जाते हैं.

सनाय के पौधे की पहचान

सनाय का पौधा

सनाय का पौधा  50 सेमी से 1 मीटर ऊंचा होता है. इसमें पीले रंग के 5 पटल वाले फूल लगते हैं. इस पर लगने वाली फली चपटी होती है, जो सूख कर हलका कालापन लिए भूरे रंग की हो जाती है. सनाय का पौधा Sanay Plant गर्मियों में भी हरा भरा रहता है. सनाय की पत्ती रोगों के उपचार में काम आने वाला प्रमुख भाग है.

सनाय का पौधा कहाँ मिलता है

सनाय मूलतः अरब तथा सोमालीलैंड का आदिवासी पौधा है. भारत में इसकी खेती तमिलनाडुके तिनेल्वाल्ली, त्रिचुनापल्लि आदि स्थानों पर की जाती है. पिछले कुछ वर्षों के इसकी खेती राजस्थान के पाली, जोधपुर, नागौर आदि स्थानों की मरु भूमि पर सफलता पूर्वक की जा रही है.

सनाय के औषधीय गुण | सनाय की पत्ती के फायदे

आयुर्वेदीय चिकित्सा में सनाय की महत्ता दस्तावर के रूप में है. यह एक गर्म और खुश्क औषधि है. कब्ज़ के रोगियों की कोष्ठशुद्धि के लिए सनाय की पत्ती बहुत उपयोगी है. सनाय की पत्ती वामक, वातरोग, उदरकृमि, कास एवं उदर रोगों में उपयोगी है. इसकी पत्ती में ग्लोकोसाइड, सेनोसाइड्स-A (Sennosides A) एवं सेनोसाइड्स-B (Sennosides B) आदि प्रमुख तत्व पाए जाते हैं. राजस्थान की सनाय की पत्ती में सेनोसाइड्स-A (Sennosides A) एवं सेनोसाइड्स-B (Sennosides B) की 4 प्रतिशत तक मात्रा पाई जाती है. इसलिए राजस्थान की सनाय अधिक गुणकारी होती है.

4. शतावरी Shatawar

शतावर को शतावरी भी कहते हैं. यह कांटेदार पत्तियों वाला औषधीय पौधा है. शतावरी की जड़ को औषधि बनाने में प्रयोग किया जाता है.

शतावरी के पौधे की पहचान | शतावरी का पौधा कैसा होता है

शतावर का पौधा

यह एक झाड़ीदार पौधा है, जिसकी पत्तियां कांटेदार होती हैं. शतावरी के पौधे का तना पतला और कमजोर होता है. इस पर सफ़ेद रंग के सुगन्धित फूल लगते हैं. इनके फलों का रंग पकने पर लाल हो जाता है.इसकी जड़ें मूली जैसी, लेकिन पतली और गुच्छेदार होती हैं.

शतावरी का पौधा कहाँ मिलता है

शतावरी का पौधा भारत में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के सीमावर्ती इलाकों, जहाँ 6- 7 महीने गर्मी पड़ती है, में मिलता है. इसकी खेती भी भारत में शुष्क क्षेत्रों में की जाती है. भारत में शतावरी की कई प्रजातियाँ मिलती हैं. शतावरी की एक किस्म को सफ़ेद मूसली भी कहा जाता है.

शतावरी के औषधीय गुण | शतावरी का उपयोग | शतावरी के फायदे

शतावरी की जड़ पौष्टिक, बलवर्द्धक,  नींद लाने वाली, पित्त नाशक एवं दुग्ध वर्धक होती हैं. इसे गायों को दूध की मात्रा और गुण बढ़ाने के लिए हरे चारे में मिलाकर खिलाया जाता है. यह ग्रहणी, अतिसार और अर्श में भी उपयोगी है. शतावरी की जड़ का उपयोग शतावरी घृत, शतावरी पानक, नारायण तेल, शतावरी चूर्ण, सुपारीपाक, वसंतकुसुमाकर रस, लक्ष्मीविलास रस, धातुपौष्टिक चूर्ण एवं सरस्वतारिष्ठ, shatawari kalp आदि औषधियों में किया जाता है.

5. नींबू घास (लेमन ग्रास) (Lemon Grass)

नींबू घास (लेमन ग्रास) यह एक सुगन्धित घास की प्रजाति का औषधीय पौधा है. लेमन ग्रास की पत्तियों को औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है.

नींबू घास (लेमन ग्रास) की पहचान

नींबू घास lemon grass

लेमन ग्रास एक सुगन्धित पौधा है. इसका पौधा घानी और लगभग 1 मीटर लम्बी पत्तियों वाला होता है. लेमन ग्रास की पत्तियों को मसलने पर नींबू जैसी सुगंध आती है.

लेमन ग्रास को हिंदी में क्या कहते हैं

लेमन ग्रास को हिंदी में नींबू घास कहते है.

लेमन ग्रास का बीज कहां मिलेगा?

लेमन ग्रास का बीज आप अमेज़न से ऑनलाइन मंगा सकते हैं.

लेमन ग्रास कैसे लगाएं

लेमन ग्रास के पौधे में से एक तना काटकर जमीन में दबा दीजिये. कुछ ही दिनों में उसमें से नया पौधा अंकुरित होने लगेगा. लेमन ग्रास को बीज के माध्यम से भी लगाया जाता है.

लेमन ग्रास का पौधा कहाँ मिलता है

लेमन ग्रास की खेती मुख्यतः उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश जम्मू कश्मीर, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में पैदा होती है. नींबूघास देश के हर हिस्से में उगाई जाती है. यह बेकार पड़ी जमीन पर भी उगाई जा सकती है. लेमन ग्रास को घर में किसी गमले में भी उगाया जा सकता है.

लेमन ग्रास के औषधीय गुण | लेमन ग्रास के फायदे

लेमन ग्रास पसीना लाने वाली, मूत्रवर्धक, बुखार को ठीक करने वाली, पाचक, औषधि है. इसकी पत्तियों से सगंध नामक तेल निकाला जाता है जो सेंट, साबुन, अगरबत्ती, धूपबत्ती, तथा महिलाओं के सौंदर्य प्रसाधनों में प्रयोग किया जाता है.

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