ताली बजाकर और राम नाम से करें पेट की बीमारियों का इलाज | ताली बजाने के फायदे

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ताली बजाने के फायदे : भारत में अधिकतर लोग पेट की समस्याओं से जूझ रहे हैं. पेट की समस्याएं आगे चलकर बीमारियाँ बन जाती हैं. और पेट की बीमारियों से शरीर की तमाम बीमारियाँ जन्म लेती हैं. इसलिए पेट को ठीक रखना अत्यंत आवश्यक है, जिससे भविष्य में शरीर में कोई भी अन्य बीमारी पैदा न हो सके. इस लेख में हम आपको ताली बजाकर पेट की बीमारियों का इलाज करना और ताली बजाने के फायदे बताएँगे.

ताली चिकित्सा | ताली बजाने के फायदे

भारत प्राचीन समय से चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी रहा है.  प्राचीन समय से ही रोगों के इलाज के लिए कई प्रकार की विधियाँ मौजूद थीं. आज के समय में भी रोगों के इलाज के लिए तमाम पैथियां मौजूद हैं. एलोपैथी, होम्योपैथी, यूनानी, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, चुम्बक चिकित्सा, रेकी चिकित्सा, एरोमथैरेपी, एक्यूप्रेशर और प्राणायाम. लेकिन एक विधि ऐसी है, जो आज लुप्तप्राय हो गयी है. यदि कहीं है भी तो उसका उद्देश्य बदल गया है. बीमारी को भगाने की वह विधि है ताली बजाना और कीर्तन करना.

ताली से बीमारी कैसे दूर होती है

ताली चिकित्सा पद्धति का और अर्चना का गहरा तालमेल है. एक्यूप्रेशर और सुजोक चिकित्सा पद्धति के अनुसार हमारे हाथों मन सभी बीमारियों को ठीक करने के बिंदु होते हैं, जिन्हें दबाकर हमारे रोगों को बहुत जल्दी आराम मिल जाता है. जब हमारे मन को कोई बात अच्छी लगती है तो अपने अन्दर की ख़ुशी को व्यक्त करने के लिए एक हाथ को दुसरे हाथ पर मारकर ताली बजाते हैं. इससे हमारे हाथों के सारे बिंदु दब जाते हैं और रोगों में सुधार होना शुरू हो जाता है.

पेट की बीमारियों के इलाज के लिए ताली बजाने का क्या तरीका है

पेट की बीमारी दूर करने के लिए ताली बजाने का अलग ही तरीका होता है.  इसके लिए दायें हाथ की चार उँगलियों को बाएं हाथ की हथेली पर जोर-जोर से और जल्दी-जल्दी मारना चाहिए.यह प्रक्रिया दिन दो बार सुबह और शाम को करनी चाहिए. ताली बजाने की आवाज़ जोर-जोर से और सामान रूप से आनी चाहिए. इस ताली के प्रयोग से पेट सम्बंधित समस्त रोग जैसे कब्ज़, एसिडिटी, मन्दाग्नि, अपच, भूख न लग्न, खाली पेट गैस बनना आदि समाप्त होते हैं.

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उदासी दूर करने के लिए ताली का प्रयोग

एक छोटा सा प्रयोग आप कभी भी कर सकते हैं. आपका या आपके बच्चे का मन पढाई में नहीं लग रहा हो या मन शांत न, शरीर में आलस्य हो, मन एकाग्र न हो रहा हो तो ऊपर बताई गयी विधि से 2 मिनट तक ताली बजाएं. आप महसूस करेंगे कि आपका मन शांत और एकाग्र हो गया है तथा शरीर से आलस्य दूर हो गया है.

ताली बजाकर जोड़ों के दर्द की चिकत्सा

संधिवात, बाय या वात का रोग आजकल बहुतायत में हो गया है. 40 साल की उम्र के महिला और पुरुषों को यह रोग होना शुरू हो गया है. यह रोग भी ताली बजाकर ठीक किया जा सकता है. इसके लिए दोनों हाथों को बराबर मिलाते हुए ताली बजाएं. ताली बजाते हुए हथेली से हथेली मिलनी चाहिए और उंगली से उंगली. इस प्रकार के निरंतर अभ्यास से जोड़ों के दर्द को आराम मिलता है और उनकी जकड़ाहट ख़त्म होती है.

ताली बजाने से अनिद्रा और तनाव का इलाज

अनिद्रा की बीमारी में भी ताली बजाने की प्रक्रिया बहुत अच्छा काम करती है. अनिद्रा की स्थिति में उपरोक्त विधि से पूरे हाथ मिलकर ताली बजानी चाहिए. रात को सोने से पहले 15-20 मिनट पहले ताली बजाने से अनिद्रा की बीमारी ठीक होने लग जाती है. रात को ठीक वक्त पर नींद जब आने लगे, तो ताली बजाने का अभ्यास छोड़ना नहीं चाहिए और यह अभ्यास सुबह और शाम को करना चाहिए, जिससे अनिद्रा और तनाव दोबारा न हो सके.

 निम्न रक्तचाप (low blood pressure) का ताली बजाकर इलाज

उच्च रक्तचाप (high blood pressure) की तो बहुत सारी दवाइयां आजकल बन गयी हैं. लेकिन निम्न रक्तचाप ((low blood pressure) में रोगी की अवस्था बहुत ख़राब हो जाती है. उसको उठने-बैठने और बोलने की भी शक्ति नहीं रहती. ऐसे में निम्न रक्तचाप में ताली बजाकर तुरंत लाभ मिलता है. low blood pressure को बढाने के लिए सीधे खड़े होकर हाथ नीचे लटका लें. फिर दोनों हाथों को थोड़ा आगे करके ताली बजानी शुरू करें. फिर धीरे धीरे ताली बजाते हुए दोनों हाथों को ऊपर की और ले जाएँ. जब हाथ सिर की ऊपर पहुँच जाएँ, तो गोल घुमाकर हाथों को धीरे से प्रारंभिक अवस्था में ले जाएँ और ताली बजाने की प्रक्रिया फिर से शुरू करें. उक्त रक्तचाप में यह प्रक्रिया ऊपर से नीचे की तरफ करें.

अन्य बीमारियों का ताली बजाकर इलाज

उपरोक्त बीमारियों के अलावा श्वास सम्बन्धी रोग, सर्वाइकल, जोड़ों में जकड़न आदि रोगों में भी ताली बजाने की प्रक्रिया बहुत फायदेमंद है. इसके लिए सीधे खड़े होकर दोनों हाथों को सीधे करके अपनी छाती के सामने लायें और ताली बजाएं. इसके नियमित सुबह शाम के अभ्यास से सांस फूलना, श्वास नालियों में रूकावट, खर्राटे आदि समस्याओं से मुक्ति मिलती है.

गांधीजी ने कहा है कि राम नाम प्राकृतिक चिकित्सा का छठा तत्व है. जब आप ताली बजाएं तो राम का नाम भी रटना शुरू कर दें. इससे भगवन भजन भी होगा, और ताली के द्वारा शरीर की चिकित्सा भी होगी. आधुनिक समय में खिलखिला कर हँसना, ताली बजाना आदि असभ्यता का प्रतीक बना दिया गया है. जिसके कारण हम अपनी भावनाओं को अपने अन्दर ही दबा लेते हैं. आप यह सोचना छोड़कर कि दुसरे क्या सोचेंगे, ताली बजाने की प्रक्रिया का लगातार अभ्यास करें. ताली बजाते हुए कभी यह न सोचें, कि दूसरे लोग क्या सोचेंगे. आप निश्चिन्त होकर ताली बजाएं और स्वास्थ्य लाभ लें.

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